Sunday, December 29, 2024

Difference between Vetting and Concurrence

Difference between Vetting and Concurrence.

वेटिंग:-
किसी भी स्टेटमेंट के आंकड़े (figures) की तथ्यात्मक शुद्धता की जांच को "वेटिंग" कहा जाता है।वेटिंग को दूसरे शब्दों में पुनरीक्षण या स्क्रूटिनी भी कहा जाता है। किसी भी प्रस्ताव की सावधानीपूर्वक और महत्वपूर्ण परीक्षण किया जाता है।उदाहरण के लिए वेटिंग ब्रीफिंग नोट्स,प्राक्कलन,खरीद आदेश आदि का किया जाता है।

Concurrence (कंकरेन्स)
कंकरेन्स अर्थात सहमति कार्यकारी अधिकारी द्वारा दिये गए प्रस्ताव जिसमें आँकड़े भी संदर्भित रहता है से वित्त विभाग की सहमति।
     यानी कोई भी प्रस्ताव पर सहमत होना ही कंकरेन्स है।उ

completion report

Completion Report
1.समापन रिपोर्ट क्या है ? (5)

2.समापन रिपोर्ट की जाँच के प्रमुख बिंदु ? (5)

1. परियोजना के कार्य की समाप्ति पर जिसके लिए पहले से ही प्राक्कलन स्वीकृत है के लिए एक रिपोर्ट तैयार किया जाता है जिसे "समापन रिपोर्ट" कहते हैं । इसे फॉर्म E 1706 में तैयार किया जाता है, जिसमें निर्मित किए गए निर्माण कार्यों की लागत का पिछले स्वीकृत प्राक्कलन में दी गई लागत से मिलान करना है एवं कमी बेशी और बचत के बारे में विस्तृत व्याख्या करना है।
     
          समापन रिपोर्ट में निम्नलिखित के लिए संक्षिप्त स्पष्टीकरण भी दिए जाने चाहिए :-
(i) प्रत्येक उप निर्माण कार्य के अंतर्गत प्राक्कलित प्रावधान के ऊपर कम से कम 10% या 25,000 इनमें से जो भी कम हो का आधिक्य, और
(ii) किसी भी उप निर्माण कार्य के अंतर्गत कम से कम 20% या 1 लाख रुपए इनमें से जो भी कम हो ,की बचत।

नोट:- यदि कमी बेशी स्वीकृत प्राक्कलन के 5 % के भीतर हो तो निर्माण रजिस्टरों में महाप्रबंधक अपनी सक्षमता के अंतर्गत संबंधित उप मुख्य इंजीनियर को निर्माण कार्यों की समापन रिपोर्ट को अनुमोदित करने की अधिकार शक्ति दे सकते हैं।

     किसी समापन रिपोर्ट का उद्देश्य वास्तव में निर्मित किए निर्माण कार्यों की लागत का पिछले स्वीकृत प्राक्कलन में दी गई लागत से मिलान करना है ।परियोजना की समापन रिपोर्ट जो लेखा अधिकारी द्वारा विधिवत सत्यापित हो उसी छमाही की समाप्ति के पश्चात जिसमें समापन प्राक्कलन प्रस्तुत किया गया है ,के 18 महीने के भीतर रेलवे बोर्ड को प्रस्तुत की जानी चाहिए ।इसमें व्यय के विवरण उसी प्रकार दिए जाने चाहिए जैसे की रेलवे बोर्ड द्वारा स्वीकृत संक्षिप्त प्राक्कलन (Abstract Estimate) में हो और यदि उनमें कोई ठोस आशोधन (Material Modification) किया गया हो तो उसका उल्लेख किया जाना चाहिए ।इसके अतिरिक्त इसमें ऐसी अन्य जानकारी भी दी जानी चाहिए जो रेल प्रशासन के विचार से रेलवे बोर्ड के लिए महत्त्व की हो।
      नवनिर्मित रेलवे लाइनों के मामले में समापन रिपोर्ट के साथ एक तुलनात्मक विवरण भी भेजा जाना चाहिए जिसमें लाइन की यथा प्रत्याशित और समापन लागत के संदर्भ में अपडेट की हुई वित्तीय संभावनाएं दिखाई जाए। यदि समापन रिपोर्ट तैयार करते समय उस अवधि तक आमदनी में मूल प्रत्याशाओं की अपेक्षा भारी परिवर्तन हो चुके हो तो इसमें तथ्य को भी वित्तीय संभावनाओं की रूपरेखा बनाते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।

2. समापन रिपोर्टों की लेखा कार्यालय में जांच करके यह देखा जाना चाहिए कि :-

(i) वे उपयुक्त फार्म तैयार किया गया है या नहीं।
(ii) उनमें में की गई प्रविष्ठियां, स्वीकृत और बुक किए गए परिव्यय वर्क्स रजिस्टर के अनुरूप है या नहीं।
(iii) ऐसे सभी सामग्रियां जो निर्माण- कार्य या कार्यों को प्रभारित थी परंतु उपयोग में नहीं लाई गई भंडारों को वापस कर दी गई हो या अन्यत्र हस्तांतरित कर दी गई हो और कार्य के लेखे में उनके मूल्य को क्रेडिट खाते में लिख दिया गया है।
(iv) प्राक्कलन में उपबंधित निरमुक्त सामग्रियों (credit for the released materials) के लिए जमा की रकम संबंधित निर्माण कार्य के सामने समायोजित कर दी गई हो।
(v) निर्माण कार्य के लेखे में निर्माण कार्य से संबंधित सभी अंतिम बिलों की पोस्टिंग की शुद्धता की जांच की जाए।
(vi) अन्य मदों की अंकगणितीय शुद्धता की जांच।
(vii) यह देखा जाए कि लेखे में आधिक्य (excess) और बचतों (savings) के लिए स्पष्टीकरण संतोषजनक रूप में दिया गया हो।
         सभी समापन रिपोर्टों को लेखा अधिकारी द्वारा शुद्ध रूप में सत्यापित किया जाना चाहिए। लेखा अधिकारी के सत्यापन प्रमाण पत्र रिपोर्ट में प्रदर्शित परिव्यय को स्वीकृति देने वाले प्राधिकारी का उल्लेख किया जाना चाहिए।

civil head

CIVIL HEAD


सिविल हेड


  • 01.04.1989 से सिविल हेड प्रचलन में आया।
  • रेलवे, भुगतान एवं प्राप्ति से संबंधित सभी आइटमों जिसका नियंत्रण अन्य सिविल विभाग के पास है, को जिस हेड में बुक करते हैं, उसे सिविल हेड कहते हैं । (रेलवे द्वारा वाणिज्य विभाग के रूप में प्रदान की जाने वाली सेवाओं को छोड़कर।)
  • सभी राशियों को सीधे सिविल हेड को बुक कर दी जाती है।मासिक चालू लेखा (Monthly Account Current) के पब्लिक लेखा (Public Account) में सिविल हेड सब हेड के रूप में रहता है।
  • वित्तीय वर्ष के अंत में, सिविल हेड के अंतर्गत शेष राशि को अगले वर्ष के लिए आगे नहीं बढ़ाया जाता है। यह हेड "सरकारी खाते" ( Government Account) के रूप में रेलवे में बंद किया जाता है।

उदाहरण के लिए-

(I) कर्मचारियों और ठेकेदारों/सप्लायरों से आयकर की वसूली।
(II) CGIS की वसूली।
(III) कर्मचारियों से PLI की वसूली।
(IV) सामान्य राजस्व से लाभांश का भुगतान।
(V) केंद्रीय सरकार से ऋण पर ब्याज।


लाभ

(I) रेलवे जहाँ दूसरे विभाग के साथ लेनदेन के लिए एजेंट का काम करती है वहां से कैश लेनदेन की समाप्ति। (उदाहरण के लिए इनकम टैक्स की वसूली)

(II) अब ये आवश्यक नहीं रहा कि रेलवे चेक जारी करे वैसे भुगतान के लिए जो अभी वसूली के लिए बकाया है, या नगद रिकवरी के लिए।

(III) इस प्रक्रिया से PAO Suspense में बुकिंग में कमी आई है।

CIPS

CIPS 
पूर्ण रूप -CIPS-Centralized Integrated Payment System (केंद्रीकृत एकीकृत भुगतान प्रणाली)
CIPS एक एकीकृत भुगतान प्रणाली है जिसके माध्यम से IPAS के जरिये ठेकेदार/कर्मचारी के बिल/वेतन आदि का भुगतान किया जाता है।
इसे CRIS (Centre for Railway Information Systems) ने विकसित किया है ।पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर इसे COFMOW (Central Organization of Modernization of Works) में लागू किया गया जो सफल रहा पुनः इसे पूरे भारतीय रेलवे में लागू कर दिया गया है।
इसके लिए रेलवे का बैंकिंग पार्टनर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है।
इसके संयोजक उत्तर रेलवे है।
CIPS को IPAS से जोड़ा गया है।
इसके लिए प्रत्येक जोनल रेलवे चेक हस्ताक्षर करने वाले अधिकारियों को IPAS पर पंजीकृत कर सकता है , प्रत्येक अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को एक डिजिटल KEY मिलेगा जिसे IPAS पर पंजीकृत करना होगा एवं उस चाबी को हस्ताक्षकर्ता बैंक को एडवांस में शेयर कर सकता है।

CIPS के लाभ
चेक का डाटा IPAS से बैंक सर्वर में सीधे भेज दिया जाता है।
इससे फ्रॉड को रोका जा सकता है क्योंकि पहले के सिस्टम में चेक का डाटा IPAS से डाउनलोड कर बैंक सर्वर में अपलोड किया जाता था तो डाटा के साथ चालाकी किया जा सकता था किंतु CIPS में डाटा सीधे IPAS के सर्वर से ही बैंक के सर्वर में भेजा जाता है एवं डाटा को मॉडिफाइड नहीं जा सकता है सिर्फ देखा जा सकता है।
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Cheques and Bills

Cheques and Bills

चेक और बिल्स

लेखा संहिता प्रथम पैरा 437 (B)

चेक और बिल्स एक सस्पेन्स हेड है। इस हेड का प्रचालन रेलों द्वारा जारी किए गए चेकों के बैंकों द्वारा भुगतान करने के बाद रेलों के खाते से डेबिट की जाने वाली रकमों के सही होने की जांच के उद्देश्य से किया जाता है।

           रेलवे के लेखा अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन जितने भी चेक जारी किए जाते हैं, उनकी रकम को जो चेक मांग पत्र (Cheques Requisition) में दर्ज होती है से "चेक और बिल्स" को क्रेडिट कर दिया जाता है और उपयुक्त लेखा (final Head allocation) को डेबिट कर दी जाती है।

            बैंकों द्वारा अपने दैनिक स्क्रॉल में भुगतान किए गए चेकों को दर्ज कर फोकल बिंदु बैंक ब्रांच को भेजा जाता है, जो उसके आधार पर मुख्य स्क्रोल बना कर और पेड चेकों को संलग्न कर वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी को भेजता है। जहां सभी पेड चेकों को जांच कर 'चेक और बिल्स" को डेबिट एवं "डिपॉजिट विद रिजर्व बैंक" को क्रेडिट कर दिया जाता है।
    
             अतः इस शीर्ष में उसी चेक की राशि क्रेडिट बकाया रहना चाहिए जिसका भुगतान नहीं हुआ है। चूंकि जारी किए गए चेक 3 माह की अवधि के भीतर ही बनाए जा सकते हैं अतः इस शीर्ष में 4 माह के बाद कोई शेष नहीं रहना चाहिए। यदि कोई शेष रह जाए तो बैंकों से पूछताछ कर यह सुनिश्चित करने के बाद कि संबंधित चेकों का भुगतान वास्तव में नहीं हुआ है तो 6 माह से अधिक पुराने चेकों की राशि को अर्ध वार्षिक समीक्षा की जाती है। 


इसकी जनरल प्रविष्टियां इस प्रकार की जाती है-

1.दिनभर में जारी किए गए चेकों की कुल राशि-

उपयुक्त राजस्व,सर्विस हेड etc..................Dr.
To चेक एंड बिल्स...................................Cr.

2.भुगतान के बाद और स्क्रॉल प्राप्त होने पर

चेक एंड बिल्स....................Dr.
To पब्लिक सेक्टर बैंक........Cr.

3.महीने के अंत में जब भुगतान किए गए चेकों के आंकड़ों उपलब्ध हो और मिला लिए जाए-

पब्लिक सेक्टर बैंक .....................Dr.
To डिपॉजिट विद रिज़र्व बैंक ........Cr.

Differences between Voted & Charged Exp

Differences between Voted & Charged Exp.

स्वीकृत और प्रभृत व्यय में अंतर 



स्वीकृत व्यय
प्रभृत व्यय
01.स्वीकृत व्यय में शामिल मदों के लिए निधियों की व्यवस्था के लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक है । उसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होता है ।  
01.प्रभृत व्यय के लिए संसद की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है , किन्तु संसद व्यय के वारे में बहस कर सकते हैं । अत: प्रभृत व्यय में शामिल मदों के लिए निधियों की व्यवस्था के लिए केवल राष्ट्रपति की मंजूरी होती है ।
02.संसद इस प्रकार के खर्च को अस्वीकृत कर सकती है या इसमें कटौती या संशोधन करके स्वीकृत कर सकती है ।
02.संसद इस प्रकार के खर्च पर कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है ।
03.समान्यत: सभी प्रकार के खर्च (प्रभृत व्यय के अलावा) स्वीकृत में शामिल होते हैं ।     
03.इसमें तीन प्रकार के खर्च शामिल है .
   (i)CAG के वेतन, भत्ता एवं पेंशन।
   (ii) किसी न्यायालय के निर्णय डिक्री या अवार्ड
   (iii) संविधान या संसद के द्वारा प्रभृत घोषित किया     
      गया खर्च ।
04. भारत की समेकित निधि से किए जाने वाले प्रस्तावित अन्य व्यय को पूरा करने के लिए आवश्यक राशि।
04. भारत के समेकित निधि पर प्रभारित व्यय को पूरा करने के लिए आवश्यक राशि 
05.वित्त संहिता प्रथम पैरा 302
05.वित्त संहिता प्रथम पैरा 303

APPORTIONMENT OF EARNINGS

APPORTIONMENT OF EARNINGS.
आय के विभाजन का अर्थ है आय का वह हिस्सा, उस रेलवे द्वारा जिन्होंने परिवहन के लिए गुड्स, पैसेंजर आदि को बुक किया है के द्वारा दूसरे रेलवे को दिया जाता है। दूसरे रेलवे जो गुड्स, पैसेंजर आदि से हुए आय को न तो ओरिजिनेट किया है और न समाप्त किया है किंतु उनके सिस्टम को उपयोग में लाया गया है।
आय के विभाजन में पालन किए जाने वाला मूल सिद्धांत है कि यात्री ने कितनी दूरी तय किया या गुड्स यातायात के संबंध में कितनी दूरी तय की गई।उदाहरण के लिए कोई यात्री नई दिल्ली से भुवनेश्वर तक यात्रा किया तो मार्ग में जितने भी क्षेत्रीय रेलवे आया सभी को आय में से हिस्सा दूरी के प्रतिशत के आधार पर दिया जाएगा।
विविध आय का विभाजन नहीं किया जाता है।
आय के विभाजन के लिए केंद्रीय कृत विभाजन प्रणाली(Centerlized Apportionment System) की शुरुआत राइट्स द्वारा विकसित की गई है। यह सिस्टम 2005 से गुड्स के लिए एवं 2006 से यात्री आय के लिए प्रभाव में आया।जिसके तहत यह प्रक्रिया अपनाई जाती है।
आय के विभाजन के लिए क्रिस द्वारा PRS और UTS का डाटा अगले महीने के 10 तारीख को राइट्स को दिया जाता है।
क्षेत्रीय रेलवे द्वारा पीसीटी और बीपीटी डाटा अगले महीने की 5 तारीख तक राइट्स को प्रस्तुत किया जाता है।
क्षेत्रीय रेलवे द्वारा 7A स्टेटमेंट के जरिए गुड्स डाटा अगले महीने की 10 तारीख तक राइट्स को प्रस्तुत किया जाता है।
जो डाटा मैच नहीं होता है उसे अगले महीने के 12 तारीख तक पूरी की जाती है।
राइट्स अगले महीने की 20 तारीख तक आय के पांच स्रोतों गुड्स, पीआरएस, यूटीएस,बीपीटी और पीसीटी के लिए अलग-अलग विभाजित आय तैयार करता है इसका उपयोग जोनल रेलवे द्वारा ट्रैफिक बुक का पार्ट बी तैयार करने के लिए किया जाता है।
रेलवे के बीच आय को विभाजित करते समय केवल मूल किराया/मालभाड़ा विभाजित किया जाता है और अन्य सभी शुल्क जैसे सेवा कर, जीएसटी,अधिभार आदि को शामिल नहीं किया जाता है।

वर्तमान में आय का विभाजन क्रिस के द्वारा ही संपादित किया जाता है। गुड्स,पैंसेजर एवं विविध आय का विभाजन कर सभी रेलवे के हिस्से को बताया जाता है जिसे टीसी एवं जेवी के माध्यम से डेबिट , क्रेडिट कर एकाउंटिंग किया जाता है।

- आय का सटीक और समय पर बंटवारा तभी संभव है जब जोनल रेलवे द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए जाएं।

आय के विभिन्न स्रोतों से संबंधित डाटा समय पर प्रस्तुत करना।
नई ट्रेन शुरू करने या यातायात के लिए नए स्टेशन/सेक्शन खोलने पर मास्टर डाटा में संशोधन।
सभी अनमैच डेटा का ठीक से मिलान किया जाना

लाभ

सिस्टम ऑनलाइन आधार पर है इसलिए टीए, डी ए और अन्य भत्तों की बचत होती है।
6A,7C जैसी रिपोर्ट समय पर तैयार होने से प्रबंधन को आय में सुधार के लिए कदम उठाने में मदद मिलती है।
ऑनलाइन के माध्यम से अंतर रेलवे विवाद और मुद्दों का तुरंत निस्तारण हो जाता है।
आय का वास्तविक बँटवारा से क्षेत्रीय रेलवे के प्रदर्शन को समझने में मदद करता है।

Capital and Revenue Account

Capital and Revenue Account

पूंजी और राजस्व लेखा

रेलवे अपने लेखों की वित्तीय समीक्षा वाणिज्यिक उपक्रम के रूप में करने के लिए जो लेखा वर्ष के अंत में प्रस्तुत करते हैं उसे "पूंजी और राजस्व लेखा" कहते हैं।
यह समीक्षा प्रत्येक वर्ष की जाती है, यह पूंजी और राजस्व लेखा के लिए अलग-अलग की जाती है, और रेलवे के वार्षिक रिपोर्ट में शामिल की जाती है।
किसी रेलवे के संचालन के वित्तीय परिणामों का पर्याप्त रूप से मूल्यांकन तब तक नहीं किया जा सकता है जब तक कि उसके पूंजीगत लेन-देन का हिसाब उसके राजस्वगत लेनदेन से अलग ना रखा जाए।
पूंजीगत लेनदेन उन्हें कहा जाता है जो मूर्त परिसंपत्तियों के अधिग्रहण से संबंधित हो और राजस्वगत लेनदेन यह है जो रेलों के संचालन से संबंधित हों जिनमें आमदनी और संचालन व्यय दोनों शामिल है।
 अलाभप्रद परियोजनाओं, यात्रियों और अन्य रेल उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधाएं, कर्मचारियों के लिए सुविधाओं और सुरक्षा कार्यों जो विकास निधि से वित्त पोषित है, सुरक्षा निधि, RRSK में से किया गया खर्च अलग से दिखाया जाता है।
पूंजी एवं राजस्व लेखा का विवरण विभिन्न रजिस्टरों की सहायता से तैयार किया जाता है। जैसे विभिन्न निधियों के रजिस्टर से पूंजी व्यय का विवरण एवं उसी प्रकार राजस्व व्यय राजस्व आवंटन रजिस्टर और आमदनी के संबंध में आमदनी का रजिस्टर से तैयार किया जाता है एवं रेल मंत्रालय में प्रतिवर्ष 15 दिसंबर तक भेजा जाता है।
लेखा संहिता प्रथम पैरा 202

Standardsof financial propriety

Standardsof financial propriety.
वित्तीय मर्यादा के मानक/वित्तीय औचित्य के सिद्धांत:-
स्त्रोत-रेलवे वित्त कोड vol. I Para-116

मंजूरी देने वाले प्राधिकारियों को चाहिए कि अपनी वित्तीय शक्तियों का प्रयोग करने में निम्नलिखित सिद्धान्तों का ध्यान रखें।

1. खर्च उससे अधिक नहीं बढ़ना चाहिए जितना कि अवसर मांग करें और हरेक सरकारी कर्मचारी को सार्वजनिक धन से किये जाने खर्च के संबंध में वही सावधानी बरतनी चाहिए जो साधारण बुद्धि का एक व्यक्ति अपने धन के खर्च करने में बरतता है।

2. कोई प्राधिकारी खर्च की मंजूरी देने की अपनी शक्तियों को ऐसे आदेश देने के लिए प्रयोग न करे, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में उसके अपने लाभ में हो।

3. सार्वजनिक धन का उपयोग किसी व्यक्ति या समाज के वर्ग विशेष के लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि:-
      (I) उसमें निहित खर्च की रकम नगण्य न हो,या
     (II) रकम का दावा अदालत में न किया जा सकता हो, या
    (III) खर्च मान्य नीति या परम्परा के अनुसरण में न हो।

4. भत्तों की रकम, जैसे यात्रा-भत्ता, जो किसी विशेष प्रकार के खर्च को पूरा करने के लिए मंजूर किया गया है, का विनियमयन इस प्रकार किया जाए कि भत्ते कुल मिलाकर पाने के लिए लाभ का स्त्रोत न बनें।

Budgetary review

Budgetary Review
बजटीय समीक्षा करने के उद्देश्य
वर्ष के दौरान रेलवे बोर्ड से रेल प्रशासनों को जो भी बजट अनुदान मिलता है उस बजट अनुदान से व्यय की प्रगति के मिलान करने के लिए बजटीय समीक्षा की जाती है।बजटीय समीक्षा करने के प्रमुख उद्देश्य है।

बजट अनुदान और व्यय की प्रगति का मिलान करना।
वास्तविक व्यय जो अब वर्ष के बचे हुए महीनों में होने वाली है इसके लिए संशोधित अनुमान लगाना।
रेलवे बोर्ड को इसके लिए सक्षम बनाना।
इसके लिए वर्ष में दो समीक्षा की जाती है

(i)संशोधित प्राक्कलन
(ii)अंतिम आशोधन विवरण

(i) संशोधित प्राक्कलन :- यह समीक्षा नवम्बर माह में की जाती है ।इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाता है।
●बजट अनुपात।
●पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान किया गया व्यय।
●पिछले वित्तीय वर्ष के इसी अवधि के दौरान किया गया व्यय।
●बजट अनुदान

इस समीक्षा में अतिरिक्त बजट अनुदान की आवश्यकता या आवंटित बजट को सरेंडर किया जा सकता है।

(ii)अंतिम आशोधन विवरण:-यह विवरण प्रत्येक अनुदान के सम्बंध में रेल प्रशासन द्वारा बनाया जाता है।और रेलवे बोर्ड को हर वर्ष 21 फरवरी तक प्रस्तुत किया जाता है।इस विवरण का उद्देश्य यह है कि वर्तमान वित्त वर्ष में कितने अतिरिक्त आंवटन की आवश्यकता है और कितनी निधियां सरेंडर करना है।

इस विवरण में प्रत्येक अनुदान शीर्षों के अंतर्गत अतिरिक्त आंवटन स्वीकृत और प्रभृत (Voted & Charged) और सरेंडर बजट आदेशों के अनुसार दिखाए जाते हैं और इसके समर्थन में रेलवे बोर्ड के द्वारा जारी आदेशों के अनुसार पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया जाता है।

बाद में यदि कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन करना आवश्यक हो तो उसके बारे में हर वर्ष 20 मार्च से पहले सूचना भेज देनी चाहिए ताकि जहाँ तक सम्भव हो, राष्ट्रपति मंजूरी प्रदान कर सके और आवंटन से जितना अधिक खर्च प्रत्याशित हो उसके लिए रेल प्रशासन वर्ष के 31 मार्च से पहले समय पर पुनर्विनियोग की मंजूरी दे सके।

Books and Budget

रेलवे बजट का आम बजट में विलय-


प्रमुख बिंदु-

  1. 2017-18 के बजट से यह विलय प्रभावी हुआ है।
  2. भारतीय रेलवे के लिए सिर्फ एक डिमांड संख्या-83 भारतीय रेल मंत्रालय के रूप में किया गया है।
  3. जब इसकी शुरूआत हुई थी तब भारतीय रेलवे को डिमांड संख्या-80 आवंटित किया गया बाद में इसे बदलकर 81 और फिर 82 किया गया । अंत में 2020-21 वर्ष के लिए डिमांड संख्या-83 है।
  4. मांग संख्या 03 से 14 (कुल 12) का नाम में परिवर्तन कर SMH (Sub Major Head) 01 से 12 कर दिया गया है।जो मेजर हेड 3002-भारतीय रेलवे कार्य व्यय-वाणिज्यिक लाइन के तहत है।
  5. लेकिन व्यय का वर्गीकरण/आवंटन अभी भी भारतीय रेलवे वित्त संहिता वॉल्यूम-II के अनुसार ही है।
  6. मांग संख्या-83 को दो भागों में वर्गीकरण किया गया है-राजस्व भाग और कैपीटल भाग।
  7. राजस्व भाग का मेजर हेड-3001,3002 है।
  8. कैपिटल भाग का मेजर हेड-5002 है।
  9. कैपिटल पर ब्याज लाभांश की तरह ही लिया जाता है किंतु अब लाभांश का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है।
  10. अभी तक पूरे वर्ष में रेलवे बजट की तीन समीक्षा की जाती थी अब उसमें से एक समीक्षा अगस्त समीक्षा को बंद कर दिया गया है। अब वर्ष में दो बजट समीक्षा की जाती है-(1)RE/BE वर्तमान वर्ष के संशोधित अनुमान/अगले वर्ष के बजट अनुमान (2)Final Modification Estimate-अंतिम आशोधन विवरण।
  11. RE/BE अब नवंबर के बदले सितंबर में होने वाला है।
  12. वर्क्स बजट में केवल जो कार्य प्रगति में होंगे उसी का प्रस्ताव भेजा जाएगा।

लाभ

  • केवल एक विनियोग विधेयक ।
  • रेलवे बजट तैयार होने में जो समय और धन का ख़र्च होता था उसकी बचत।
  • रेल मंत्रालय पर राजनीतिक दबाब कम।
  • लोक लुभावन बजट की समाप्ति।
  • राजस्व घाटा(भारतीय रेलवे का) वित्त मंत्रालय को दिया जाएगा।
  • सब मेजर हेड में पुनर्विनियोग करने के लिए रेलवे बोर्ड के लिए लचीलापन

Differences Between Demand Payable and Demand Recoverable  


देय मांगे (Demand Payable)
वसूली योग्य  मांगे (Demand Recoverable)
01. देय मांगे एक सस्पेन्स हेड है जो खर्च के लिए संचालित किया जाता है ।       
01.वसूली योग्य मांगे एक सस्पेन्स हेड है हो आमदनी के लिए संचालित किया जाता है ।
02.इसमें हमेशा क्रेडिट शेष बतलाता है,इसका अर्थ यह हुआ की अभी भुगतान होना बाकी है ।
02.इसमें हमेशा डेबिट शेष बतलाता है, इसका अर्थ यह हुआ की अभी पार्टी से वसूली होना बाकी है ।      
03.देय मांगे का संचालन किसी महीने की उपचित (accrued) समस्त राजस्व देयतायों को उसी महीने के लेखे में लाने के लिए किया जाता है । चाहे उसका निपटारा उस महीने में हुआ हो या नहीं ।
03.वसूली योग्य मांगे समस्त राजस्व आय को जो उपचित हो गया है को लेखे में लाने के लिए किया जाता है ।
04.यह शीर्ष कार्य संचालन व्यय (working exp.) के दायित्व को पूरा करने के लिए संचालित किया जाता है।
04. यह क्रेडिट बिलों रेलवे के भूमि के किराए,ब्याज,अनुरक्ष्ण प्रभार साइडिंगो के, ROB,FOB एवं लेवल क्रोसिंगों के अनुरक्ष्ण प्रभार को लेखे में लाने के लिए संचालित किया जाता है ।
05. यह प्रत्येक महीने के लिए अलग-अलग खोला जाता है ।
05.यह एक निरंतर खाता है जो वसूलियों के निपटान तक चलता रहता है ।
06.जब मार्च का सैलरी बिल पास होता है तो जनरल इंट्री मार्च के लेखे बंद होने से पहले

Revenue Head.....................Dr.
To Demand Payable...........CR.
06. रेलवे द्वारा पार्टी के लिए बिल्स तैयार करने पर

Demand Recoverable.............Dr.
To Abstract “Z”……………………………..Cr.
07.समायोजन के पश्चात
Demand Payable...........DR.
To Cheques & Bills ......Cr.


07. पार्टी से भुगतान प्राप्त होने पर
Remmittance into Bank (RIB)….Dr.
To Demand Recovarable……………Cr.  




Demand Recoverable (वसूली योग्य मांगे)

  1. वसूली योग्य मांगे एक सस्पेन्स हेड  है जो आमदनी के लिए संचालित किया जाता है।
  2. इस सस्पेंस हेड के अंतर्गत विभिन्न आमदनी "जेड" आय को रखा जाता है।
  3. इस सस्पेन्स हेड के संचालन का मुख्य उद्देश्य है साइडिंग प्रभार, किराया, वे लीव चार्ज, जमीन का किराया जो बकाया है को रेलवे के खाते में लाना।
  4. वसूली योग्य मांग के क्लियर से ट्रैफिक सस्पेंस में कमी आती है जो कि परिचालन प्रदर्शन को बेहतर बनाता है।
  5. वसूली योग्य मांग का अंतिम शेष बकाया वसूली को दिखाता है।
  6. यह एक लिंक हेड भी है जो सरकारी और वाणिज्यिक लेखों को जोड़ता है।

जनरल एंट्री

1. जब रेलवे लेखा में लेने के लिए, पार्टी के लिए बिल्स तैयार करता है तो-

Demand Recoverable..............Dr.
To Abstract  "Z" ........................Cr.

2.जब पार्टी से वास्तव में भुगतान प्राप्त हो जाता है तो-

Remittance into Bank(RIB)........Dr.
To Demand Recoverable............Cr.

3.कुछ बिल अगर वापस ले लिया जाता है जो या माफ कर दिया जाए तो -


Abstract "Z".........................-Minus Cr.
To Demand Recoverable...-Minus Dr.






Demand Payable

देय मांगे 

पैरा 220 लेखा संहिता प्रथम 

  1. देय मांगे एक उचन्त शीर्ष (suspense head) है जो मांग संख्या 12 Abstract N के तहत संचालित होता है। यह कार्य संचालन व्यय है।
  2. यह एक लिंक हेड भी है जो वाणिज्यिक लेखा के साथ सरकारी लेखा को जोड़ता है ।
  3. सरकारी लेखे में खर्च या प्राप्तियां केवल तभी रिकॉर्ड की जाती है जब वे वस्तुतः संवितरित (disbursed) किए गए हो या वसूल किए गए हो। इसके विपरीत रेलवे लेखों जो कि वाणिज्य आधार पर रखे जाते हैं महीने में अंगीकृत खर्च (expenditure incurred) या उपचित आमदनी (earning accrued) दिखाई जाएगी चाहे उसका वास्तव में भुगतान या वसूली की गई हो अथवा ना की गई हो।
  4. देय मांगों के प्रचालन का प्रमुख उद्देश्य है कि किसी महीने की उपचित समस्त राजस्व देयताओं को उसी महीने के लेखे में लाया जा सके।
  5. रेलवे की एक महीने की राजस्व देयताएं जो उसी महीने में देय न हो तो उसे "देय मांगे" नामक उचन्त शीर्ष में दूतरफा ज़माकर के महीने के संचालन व्यय के रूप में लिखें में दिखाई जाती है। जब देयताएं वास्तव में दे दिया जाता है तो उस राशि से इस शीर्ष को डेबिट कर दिया जाता है।
  6. इस प्रकार इस उचन्त शीर्ष में जो राशि रहेगी वह देयता को दिखाई देगी। इस उचन्त शीर्ष में बकाया राशि हमेशा क्रेडिट बैलेंस रहेगी।
  7. इस उचन्त शीर्ष में प्रत्येक महीने के लिए अलग-अलग खाता खोला जाता है जैसे अप्रैल का मई का।

जनरल एंट्री इस प्रकार होगा-

Salary Bill for March, Passed for Payment in April

1. मार्च के लेखे बंद होने से पहले जनरल एंट्री

Final Heads of Revenue Working Exp. .......Dr.

To Demand Payable..............Cr.


2. मार्च के देय मांगों की देयता समायोजन होने के बाद -

Cash Book entry (April Account)

Demand Payable..............Dr.

To Cheque and bills........Cr.






Capital and Revenue Account


पूंजी और राजस्व लेखा


  1. रेलवे अपने लेखों की वित्तीय समीक्षा वाणिज्यिक उपक्रम के रूप में करने के लिए जो लेखा वर्ष के अंत में प्रस्तुत करते हैं उसे "पूंजी और राजस्व लेखा" कहते हैं।
  2. यह समीक्षा प्रत्येक वर्ष की जाती है, यह पूंजी और राजस्व लेखा के लिए अलग-अलग की जाती है, और रेलवे के वार्षिक रिपोर्ट में शामिल की जाती है।
  3. किसी रेलवे के संचालन के वित्तीय परिणामों का पर्याप्त रूप से मूल्यांकन तब तक नहीं किया जा सकता है जब तक कि उसके पूंजीगत लेन-देन का हिसाब उसके राजस्वगत लेनदेन से अलग ना रखा जाए।
  4. पूंजीगत लेनदेन उन्हें कहा जाता है जो मूर्त परिसंपत्तियों के अधिग्रहण से संबंधित हो और राजस्वगत लेनदेन यह है जो रेलों के संचालन से संबंधित हों जिनमें आमदनी और संचालन व्यय दोनों शामिल है।
  5.  अलाभप्रद परियोजनाओं, यात्रियों और अन्य रेल उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधाएं, कर्मचारियों के लिए सुविधाओं और सुरक्षा कार्यों जो विकास निधि से वित्त पोषित है, सुरक्षा निधि, RRSK में से किया गया खर्च अलग से दिखाया जाता है।
  6. पूंजी एवं राजस्व लेखा का विवरण विभिन्न रजिस्टरों की सहायता से तैयार किया जाता है। जैसे विभिन्न निधियों के रजिस्टर से पूंजी व्यय का विवरण एवं उसी प्रकार राजस्व व्यय राजस्व आवंटन रजिस्टर और आमदनी के संबंध में आमदनी का रजिस्टर से तैयार किया जाता है एवं रेल मंत्रालय में प्रतिवर्ष 15 दिसंबर तक भेजा जाता है।
  7. लेखा संहिता प्रथम पैरा 202

Differences Between Remittance Transaction & Transfer Transaction

धन प्रेषण लेनदेन और अंतरण लेनदेन 

धन प्रेषण लेनदेन (Remittance Transaction)
अंतरण लेनदेन (Transfer Transaction)
01.रेल मंत्रालय और अन्य मंत्रालयों के बीच RBI के केंद्रीय लेखा विभाग के माध्यम से निपटाये जाने वाले लेनदेन को धन प्रेषण लेनदेन कहते हैं ।
1.एक ही रेलवे की विभिन्न लेखा इकाइयों या दो रेलवे के बीच लेनदेन को अंतरण लेनदेन कहते हैं ।
02.यह लेनदेन चेक और ड्राफ्ट के माध्यम से किया जाता है ।                                 
02.यह लेनदेन खाता समायोजन (Books Adjustment) के जरिये होता है ।      
03. इसमें लेनदेन की सूचना डेबिट/क्रेडिट एडवाइस द्वारा की जाती है ।
03.इसमें लेनदेन की सूचना TC द्वारा दी जाती है ।
04.इसमें निम्न उचंत शीर्ष प्रचालित किए जाते हैं –
L-Suspense, RBS, Various Government Adjustment Suspense.
04.इसमें किसी भी प्रकार के उचंत शीर्ष का प्रचालन नहीं किया जाता है ।
05.इसके अंतर्गत बकाया के निपटारे के लिए रेल प्रशासन के साथ-साथ संबंधित राज्य सरकार एवं अन्य लेखाधिकारी का योगदान रहता है,साथ ही आरबीआई का भी योगदान रहता है।
05.इसके निपटारे के लिए पूरी तरह रेल प्रशासन उत्तरदायी होता है ।
06. इसका विस्तृत वर्णन लेखा संहिता प्रथम के 417 से 435 पैरा में है ।
06. इसका विस्तृत वर्णन लेखा संहिता प्रथम पैरा 404 से 416 में है ।

 




Finance Account

वित्त लेखा

  1. वित्तीय लेखा सरकारी लेखांकन के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। अर्थात सरकारी लेखों की अपेक्षाओं के अनुसार रखे गए लेखों को सामूहिक रूप से "वित्तीय लेखा" कहा जाता है।
  2. रेलवे के वित्तीय लेखा वार्षिक रूप में तैयार किए जाते हैं एवं विभिन्न रेलवे लेखा शीर्षों के अधीन रेलवे के खातों में दर्ज किए गए लेनदेन को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं।
  3. इसे वित्तीय लेखा नामक गुटका में संकलित कर जिसमें विभिन्न रेलवे शीर्षों के सार लेखे ब्योरेवार अनुसूचियों साथ में परिशिष्ट होता है को निर्धारित समय में रेलवे बोर्ड भेजा जाता है।
  4. वित्त लेखा में दो परिशिष्ट होता है। (क) पूंजी और राजस्व लेखों से संबंधित अप्रत्यक्ष प्रभारों का विवरण।(ख) रक्षा मंत्रालय की ओर से हाथ में लिए गए निर्माण कार्य जिन पर ब्याज और अनुरक्षण प्रभार लिया जाता है।
  5. परिशिष्ट "क" का उद्देश्य ऐसी सूचना उपलब्ध कराना है जो संकलित लेखों में नहीं दी जाती है, लेकिन जिसका होना रेलवे की वित्तीय स्थिति को भली प्रकार से समझना अनिवार्य है। परिशिष्ट "क" का वित्त लेखों के साथ भेजा जाना अनिवार्य है। जबकि परिशिष्ट "ख" का नहीं। लेकिन फिर भी इसे बनाया जाना चाहिए और रक्षा मंत्रालय से आवश्यक वसूलियां करने के प्रयोजन के लिए रिकॉर्ड में रखा जाना चाहिए।
  6. वित्त लेखों की लेखा परीक्षा कराई जानी चाहिए तथा लेखा परीक्षा प्रमाण पत्र की एक हस्ताक्षरित प्रति रेल मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए।




Public Sector Bank Suspense


  1. यह मेजर हेड 8658 के तहत नया उपशीर्ष है जो अक्टूबर 1993 से प्रचलन में है।
  2. ये बैंकों में रेलवे के लेनदेन डेबिट और क्रेडिट दोनों के समायोजन पर निगरानी के लिए होता है।(सिर्फ पेंशन भुगतान को छोड़कर)
  3. यह चेक और बिल्स सस्पेन्स एवं बैंकों में धन प्रेषण RIB (Remittance into Bank) सस्पेन्स को क्लियर करने के लिए संचालित होता है।

चेक और बिल्स एवं पब्लिक सेक्टर बैंक सस्पेन्स-


जब चेक बैंक में कैश हो जाता है तो बैंक (फोकल पॉइंट शाखा) के माध्यम से डेली स्क्रॉल लेखा विभाग में भेजता है।स्क्रॉल को जांच करने के बाद खाता में समायोजन इस प्रकार किया जाता है।

1. चेक और बिल्स ..............(-Cr.)

To PSB A/C.....................(Cr.)

2. जब PSB, RBI को नकद राशि भुगतान में समायोजित कर देता है-

PSB......................(-Cr.)
To RBI..................(Cr.)



बैंकों में धन प्रेषण (RIB) और पब्लिक सेक्टर बैंक सस्पेन्स-


पब्लिक सेक्टर बैंक दैनिक स्क्रॉल TR नोट (Treasury Remittance Note) के साथ लेखा विभाग को भेजता है,वेरिफिकेशन के बाद लेखा में इस तरह समायोजन किया जाएगा।

1.Remittance into Bank ..............(-Dr.)
To PSB...............................................(Dr.)

2.RBI के साथ समायोजन के बाद

PSB...................................(-Dr.)
To Reserve Bank Deposit.(Dr)


Cheques and Bills

चेक और बिल्स

लेखा संहिता प्रथम पैरा 437 (B)

चेक और बिल्स एक सस्पेन्स हेड है। इस हेड का प्रचालन रेलों द्वारा जारी किए गए चेकों के बैंकों द्वारा भुगतान करने के बाद रेलों के खाते से डेबिट की जाने वाली रकमों के सही होने की जांच के उद्देश्य से किया जाता है।

           रेलवे के लेखा अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन जितने भी चेक जारी किए जाते हैं, उनकी रकम को जो चेक मांग पत्र (Cheques Requisition) में दर्ज होती है से "चेक और बिल्स" को क्रेडिट कर दिया जाता है और उपयुक्त लेखा (final Head allocation) को डेबिट कर दी जाती है।

            बैंकों द्वारा अपने दैनिक स्क्रॉल में भुगतान किए गए चेकों को दर्ज कर फोकल बिंदु बैंक ब्रांच को भेजा जाता है, जो उसके आधार पर मुख्य स्क्रोल बना कर और पेड चेकों को संलग्न कर वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी को भेजता है। जहां सभी पेड चेकों को जांच कर 'चेक और बिल्स" को डेबिट एवं "डिपॉजिट विद रिजर्व बैंक" को क्रेडिट कर दिया जाता है।
    
             अतः इस शीर्ष में उसी चेक की राशि क्रेडिट बकाया रहना चाहिए जिसका भुगतान नहीं हुआ है। चूंकि जारी किए गए चेक 3 माह की अवधि के भीतर ही बनाए जा सकते हैं अतः इस शीर्ष में 4 माह के बाद कोई शेष नहीं रहना चाहिए। यदि कोई शेष रह जाए तो बैंकों से पूछताछ कर यह सुनिश्चित करने के बाद कि संबंधित चेकों का भुगतान वास्तव में नहीं हुआ है तो 6 माह से अधिक पुराने चेकों की राशि को अर्ध वार्षिक समीक्षा की जाती है। 


इसकी जनरल प्रविष्टियां इस प्रकार की जाती है-

1.दिनभर में जारी किए गए चेकों की कुल राशि-

उपयुक्त राजस्व,सर्विस हेड etc..................Dr.
To चेक एंड बिल्स...................................Cr.

2.भुगतान के बाद और स्क्रॉल प्राप्त होने पर

चेक एंड बिल्स....................Dr.
To पब्लिक सेक्टर बैंक........Cr.

3.महीने के अंत में जब भुगतान किए गए चेकों के आंकड़ों उपलब्ध हो और मिला लिए जाए-

पब्लिक सेक्टर बैंक .....................Dr.
To डिपॉजिट विद रिज़र्व बैंक ........Cr.






Remittance into Bank


बैंकों में धन प्रेषण 

पैरा 437 लेखा संहिता प्रथम

बैंकों में धन प्रेषण (remittance into bank) एक सस्पेन्स हेड है। रेलों में जितनी भी आमदनी होती है उसे बैंकों में भेजा जाता है।प्रेषित की गई रकम की निगरानी के लिए इस हेड को खोला जाता है।


          बैंकों को भेजी गई समस्त राशि से इस हेड को डेबिट किया जाता है।महीने के अंत में सभी आंकड़े का मिलान करने के बाद जो बैंकों ने स्वीकार कर लिया है उस रकम से डिपॉजिट विद रिज़र्व बैंक (RBD) हेड को डेबिट कर देते हैं और रेमिटेंस इनटू बैंक (RIB) को क्रेडिट कर देते हैं।यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि महीनों में बैंकों द्वारा प्राप्त धन-प्रेषणों की केवल उतनी ही राशि "रिज़र्व बैंक डिपॉजिट" में समायोजित की जाए जितनी कि महालेखापाल की ओर से रिजर्व बैंक द्वारा समायोजित की गई है।


         प्रत्येक बैंक के साथ रेलवे जो भी लेनदेन करता है, उसका दैनिक स्क्रोल बनाकर बैंक,स्टेटमेंट के साथ रेलवे अधिकारी को भेजता है।लेनदेन अलग-अलग यानी चेक पेड और आय का बनाता है।इन सभी स्टेटमेंट को चेक और नकदी प्रेषण नोटों के काउंटर फाइल्स के साथ शीघ्रता से जाँच करनी चाहिए।

      किसी भी प्रकार का त्रुटि होने पर केंद्रीय लेखा अनुभाग(रिजर्व बैंक)/नागपुर को बताना चाहिए, जिससे की वह उसका निपटारा उसी महीने में करे।यही प्रक्रिया बैंकों और भंडारों के विभिन्न रेलवे खातों के बीच अवर्गीकृत मदों के लिए भी लागू होगा।

इसकी जनरल प्रविष्टियां इस प्रकार की जाएगी-

1. बैंकों में जब विभिन्न शीर्षों (X,Y,Z) से आय प्राप्त होने के बाद-

Remittance into Bank(A/C).................Dr.

To Appropriate Head (X,Y,Z)..............Cr.

2. जब क्रेडिट स्क्रोल बैंक से प्राप्त होता है तो-

Public Sector Bank (A/C)...................Dr.

To Remittance into Bank(A/C)..........Cr.

3. महीने के अंत में केंद्रीय लेखा अनुभाग(अनुभाग) नागपुर (Reserve Bank of India) से पिंक स्लिप आ जाने पर (यानी आंकड़े बैंक के आंकड़ों से मिला लिए जाएं तो)

Deposits with Reserve Bank ............Dr.

To Public sector Bank........................Cr.






Differences between Voted & Charged Exp.

स्वीकृत और प्रभृत व्यय में अंतर 



स्वीकृत व्यय
प्रभृत व्यय
01.स्वीकृत व्यय में शामिल मदों के लिए निधियों की व्यवस्था के लिए संसद की स्वीकृति आवश्यक है । उसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होता है ।  
01.प्रभृत व्यय के लिए संसद की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है , किन्तु संसद व्यय के वारे में बहस कर सकते हैं । अत: प्रभृत व्यय में शामिल मदों के लिए निधियों की व्यवस्था के लिए केवल राष्ट्रपति की मंजूरी होती है ।
02.संसद इस प्रकार के खर्च को अस्वीकृत कर सकती है या इसमें कटौती या संशोधन करके स्वीकृत कर सकती है ।
02.संसद इस प्रकार के खर्च पर कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकती है ।
03.समान्यत: सभी प्रकार के खर्च (प्रभृत व्यय के अलावा) स्वीकृत में शामिल होते हैं ।     
03.इसमें तीन प्रकार के खर्च शामिल है .
   (i)CAG के वेतन, भत्ता एवं पेंशन।
   (ii) किसी न्यायालय के निर्णय डिक्री या अवार्ड
   (iii) संविधान या संसद के द्वारा प्रभृत घोषित किया     
      गया खर्च ।
04. भारत की समेकित निधि से किए जाने वाले प्रस्तावित अन्य व्यय को पूरा करने के लिए आवश्यक राशि।
04. भारत के समेकित निधि पर प्रभारित व्यय को पूरा करने के लिए आवश्यक राशि 
05.वित्त संहिता प्रथम पैरा 302
05.वित्त संहिता प्रथम पैरा 303

Reserve Bank Suspense (रिजर्व बैंक उचन्त)

  • लेखा संहिता I पैरा 436।
  • यह एक उचन्त शीर्ष है, जो रेलवे के अलावा अन्य लेखाधिकारी जैसे (पीएनटी, रक्षा )से आवक (inward) लेनदेन को समायोजित करने के लिए संचालित किया जाता है।
  • इस उचन्त शीर्ष में धन प्रेषण (Remittance into Bank) एवं चेक और बिल के लेनदेन के अलावा विभिन्न मदों सत्यापन और स्वीकृति के बाद लेखे के उपयुक्त शीर्ष "रिजर्व बैंक उचन्त" में डेबिट (प्राप्तियों के मामले में) क्रेडिट (भुगतान के मामले में) किया जाता है।
  • अन्य लेखाअधिकारियों द्वारा रिजर्व बैंक को सूचित किए गए लेन-देनों के समाशोधन (clearance) के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से समाशोधन ज्ञापन (clearance memo) मिल जाने पर इस उचन्त शीर्ष  को "रिजर्व बैंक डिपॉजिट" से contra डेबिट/ क्रेडिट करके सफाया (clear) कर दिया जाता।
  • इस उचन्त शीर्ष के तहत बकाया को वित्त वर्ष अर्थात 31 मार्च के अंत में शून्य कर देना चाहिए अगर किसी कारणवश फिर भी शेष बच जाता है तो अगर डेबिट शेष है तो MAR को तथा क्रेडिट शेष है तो डिपॉजिट मिसलेनियस में रखना चाहिए।


जनरल एंट्री इस प्रकार की जाएगी

(i) अन्य लेखाधिकारी से वाउचर और लेखा प्राप्त होने पर-


संबंधित राजस्व शीर्ष/सर्विस हेड आदि.....Dr./Cr.
 
To रिजर्व बैंक सस्पेन्स..................Cr./Dr.

(ii) रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (नागपुर) से क्लियरेंस मेमो प्राप्त होने पर -

रिज़र्व बैंक सस्पेन्स ..................Dr./Cr.
To रिज़र्व बैंक डिपॉजिट (रेलवे)..Cr./Dr.


General Books and Subsidiary Books.

लेखा संहिता I अध्याय 3


सामान्य खाते और सहायक खाते


सामान्य खाते परिभाषा

रेलवे में लेखा अधिकारियों को अपने लेखा क्षेत्र के सभी लेनदेन को इकट्ठा करने और उसे हिसाब में लाने के प्रयोजन के लिए मासिक एवं वार्षिक लेखों का संकलन करने के लिए कुछ आवश्यक रिकॉर्ड रखते हैं, जिन्हें "रेलवे के सामान्य खाते" कहते हैं।

इसके अंतर्गत निम्नलिखित शामिल है।
1.नकद लेन-देन का दैनिक सार अथवा सामान्य कैश बुक।(F304)
2.नकद लेन-देन का मासिक सार अथवा सामान्य कैश सार बही (F306)
3.जनरल (F307)
4.लेजर (F310)

सामान्य कैश बुक (General Cash Book)

इस अभिलेख का उद्देश्य उन सभी नगद लेनदेन को लेखों में लाना है जिनका संबंध लेखा विभाग की वास्तविक प्राप्ति और भुगतान से है।

(i) इसे फार्म संख्या 304 में खोला जाता है ।
(ii) इसमें की गई प्रविष्टि के समर्थन में लेखा अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित वाउचर (co7/MCR) होना चाहिए।
(iii) उसका हर रोज कैश शेष निकाला जाना चाहिए और उसका मिलान कैशियर के कैशबुक(A-1917) से किया जाना चाहिए।
(iv) अनुभाग के इंचार्ज अधिकारी को इसकी जांच करके इसमें अपने हस्ताक्षर करने चाहिए।

सामान्य कैश बुक के डेबिट साइड में जितने भी कैश की प्राप्ति हुई है उसको दर्शाता है एवम इंट्री निम्नलिखित कागजातों से किया जाता है।

(i)स्टेशन से धन प्रेषण (station remittance) की नकदी जांच पत्रक द्वारा सभी प्राप्तियां।
(ii) बैंकों के चेकों के संबंध में-चेकों के मांग पत्र,प्रत्येक दिन, प्रत्येक बैंक के चेकों की संपूर्ण राशि के लिए एक इन्ट्री की जाएगी।
(iii) विविध नगद प्राप्तिओं के संबंध में -कैश रसीदों के प्रतिपत्रों से विविध नगद प्राप्ति के प्रत्येक मद के लिए अलग-अलग इंट्री की जाएगी।
(iv) भुगतान के लिए पास किए गए बिलों से की गई वसूली के संबंध में -जमा खाते के विभिन्न शीर्षों से।
(v) कैशियर द्वारा प्रेषित बिन भुगतान की गई रकमों के संबंध में अनपेड वेज के लिस्टों से।

क्रेडिट साइड में एंट्री निम्नलिखित कागजातों से की जाती है।
(i) बैंकों को की गई धन-प्रेषणों (Remittance into bank) के संबंध में- बैंक धन प्रेषण रसीदों से और।
(ii) भुगतानों के संबंध में डेबिट हेड के विभिन्न शीर्षों से।

सामान्य कैश सार बही (Monthly Cash Book)

(i) इसमें रिकॉर्ड प्रतिदिन नगद लेन देन के दैनिक सार में से किया जाता है।
(ii) यह दो भागों में रखी जाती है एक भाग प्राप्तियों के लिए और दूसरा भाग संवितरणो (Disbursement) के लिए।
(iii) माह के अंतिम लेन-देन का इंट्री करने के बाद इसका योग कर दिया जाता है।
(iv) बैंकों को धन प्रेषण तथा चेक और बिल के अंतर्गत किए गए जोड़ का मिलान बैंकों से प्राप्त विवरणों से किया जाता है।

जर्नल (Journal)


(i)वास्तविक नगद प्राप्ति और संवितरण के अलावा अन्य लेन देन की इंट्री जर्नल में किया जाता है ।
(ii)इसमें की गई प्रत्येक इंट्री के समर्थन में लेखा अधिकारी के द्वारा हस्ताक्षरित जर्नल स्लिप या वाउचर होना चाहिए ।
(iii)यह पूंजी और राजस्व के लिए अलग-अलग होता है ।
(iv) प्रत्येक माह का रिकॉर्ड भी अलग अलग रखा जाता है
(v) जनरल में किए गए एंट्री की शुद्धता की जांच नगद लेनदेनों की राशियों को जोड़ने के बाद जनरल में प्रत्येक लेखा शीर्ष के अंतर्गत डेबिट खाते और क्रेडिट खाते के जोड़ों से "ट्रायल बैलेंस" बना कर की जानी चाहिए और कोई अंतर पाया जाता है तो उसे ठीक किया जाना चाहिए।

लेजर (Ledger)

यह F-310 में बनाया जाता है इसका उद्देश्य विभिन्न शीर्षों में रेल प्रशासन पर समस्त प्राप्तियों एवं प्रभार तथा प्रत्येक लेखा अवधि में उनके क्रमिक शेष (progressive) का प्रदर्शन करना है इसमें अंकन जनरल से किया जाता है।

सहायक लेखा रिकॉर्ड (Subsidiary Accounts Records).

 सामान्य खातों के अतिरिक्त लेखा विभाग में निम्नलिखित सहायक लेखा रिकॉर्ड भी रखा जाता है।

(i) आमदनी का रजिस्टर
(ii) राजस्व आवंटन रजिस्टर
(iii) निर्माण कार्य रजिस्टर
(iv) उचन्त रजिस्टर ( देय मांग,विविध अग्रिम,एफ लोन और एडवांस,जमा अनपेड रजिस्टर, जमा विविध रजिस्टर आदि)



Differences between PAC and RCC  


लोक लेखा समिति (PAC)
रेलवे अभिसमय समिति (RCC)
1.लोक लेखा समिति एक स्थाई संसदीय समिति है ।
1. यह एक अस्थायी संसदीय समिति है जो समय-समय पर लोकसभा द्वारा गठित कि जाती है।
2.लोक लेखा समिति में 22 सद्स्य होते हैं। (15 लोकसभा तथा 07 राज्यसभा)
2. रेलवे अभिसमय समिति में 18 सद्स्य होते हैं (12 लोकसभा तथा 6 राज्यसभा )
3. यह समिति केंद्र सरकार के सभी विभागों या मंत्रालयों के वित्त लेखोंविनियोग लेखों की जाँच करती है ।
3.यह समिति सिर्फ रेलवे मंत्रालयों या भारतीय रेलों के भीतर वित्तीय मामलों में आवश्यक सुधार का सुझाव देती है ।
4. इस समिति के कार्य का दायरा बहुत व्यापक है ।
4. इस समिति के कार्य का दायरा रेलवे तक सीमित है।
5. यह समिति निम्न पर सिफारिश देती है ।
  (i) वित्त लेखा/विनियोग लेखों पर CAG कि वार्षिक रिपोर्ट की समी़क्षा कर इस पर सिफारिश देती है ।
(ii) भारत सरकार के वार्षिक लेखों की जाँच एवं समी़क्षा कर इस पर सिफारिश देती है ।
5. यह समिति निम्न पर सिफारिश देती है ।
(i) भारतीय रेलवे द्वारा भारत सरकार को दिये जाने वाले लाभांश की दर के संबंध में सिफारिश देना ।
(ii) सामान्य राज़स्व से DRF,DF, etc. में विनियोग के संबंध में सिफारिश देना।
(iii) रेलवे वित्तीय प्रशासन में लचीलापन तथा रेलवे लेखा एवम्‌ प्रबंधन में सुधार संबंधि सिफारिशें करती है।
6. लोक लेखा समिति की लगभग सभी सिफारिशें सरकार द्वारा क्रियान्वित की जाती है जो स्थाई  प्रकृति की होती है ।
6. रेलवे अभिसमय समिति की सिफारिशें सामान्यत: 5 वर्षों के लिए लागू की जाती है।


Differences between Government and Commercial Accounts.




सरकारी लेखा
वाणिज्यिक लेखा
01.सरकारी खातों का रखरखाव कैश के आधार पर किया जाता है । इसमें वित्तीय वर्ष के दौरान जो भी वास्तविक नकद प्राप्तियाँ और वास्तविक नकद भुगतान हुआ है उसका लेखा-जोखा रहता है।
01. वाणिज्यिक खातों का आधार Accrual (उपचित) है। इसका अर्थ यह हुआ कि अर्जित आय चाहे वह वास्तव में प्राप्त हुआ या नहीं,एवम्‌ देयताये जो देय है या नहीं ।
02.सरकारी खातों को तकनीकी रुप से वित्तीय खातों के रुप में जाना जाता है और रखरखाव सरकारी खाते के आवश्यकतानुसार किया जाता है। सरकारी खाते विभिन्न प्रमुख शीर्षों में वर्गीकृत कर प्रत्येक वर्ष संकलित किया जाता है तथा समेकित निधि का प्रतिनिधित्व करता है।
02. वाणिज्यिक खातों को तकनीकी रुप से “कैपिटल एवम्‌ राजस्व” खाता के रुप जाना जाता है । ये खाते रेलवे के वित्तीय उपक्रमों को वाणिज्यिक दॄष्टि से समी़क्षा करने में सुविधा प्रदान करता है। ये खाते भी रेलवे में हर वर्ष संकलित किया जाता है एवम्‌ रेलवे के वार्षिक रिपोर्ट में शामिल किया जाता है।
03. सरकारी खाते एकल प्रविष्टि प्रणाली पर आधारित है।
03. वाणिज्यिक खाते “दोहरे प्रविष्टि प्रणाली” पर आधारित है।
04. सरकारी लेखा में केवल आय और व्यय का खाता रखा जाता है।
04. वाणिज्यिक लेखा में व्यापार विनिर्माण, लाभ-हानि एवम्‌ तलपट तैयार किया जाता है ।
05. सरकारी खाते का डिजाइन इस प्रकार किया गया है कि कम से कम रकम टैक्सपेयर आम नागरिक से लिया जाए ताकि जनता के कल्याण एवम्‌ सुविधाऐं के लिए जो प्रोग्राम (योजना) चल रही है वो जारी रहे 
05. वाणिज्यिक खाते का प्रारूप इस प्रकार से है कि ज्यादा से ज्यादा रकम प्रतिष्ठान के स्वामी के पास आये जिससे प्रतिष्ठान लाभ में रहे।

Debt Head Report-DHR

Debt Head Report-DHR
ऋण शीर्ष रिपोर्ट 

संदर्भ लेखा संहिता प्रथम पैरा 748-752
ऋण शीर्षों (Debt Head) जैसे लोन एवं एडवांस, पीएफ, जमा, अंतर सरकार समायोजन(Inter Govt. Adjustment) के अंतर्गत बकाया का रिपोर्ट है, जिसे ऋण शीर्ष रिपोर्ट कहते हैं।
यह रिपोर्ट प्रत्येक वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी (FA&CAO) द्वारा रेलवे बोर्ड को 10 सितंबर तक भेज देना चाहिए या रेलवे बोर्ड ने जो तिथि निश्चित की हो।
इस रिपोर्ट की एक प्रतिलिपि उसी समय सांविधिक लेखा परीक्षक को भी देनी चाहिए।
प्रतिलिपि को विधिवत लेखा परीक्षा के बाद एक प्रति रेल मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए जो कि 25 सितंबर तक पहुंच जाए।
DHR-समीक्षा

DHR को मुख्यतः समीक्षा करने का उद्देश्य है यह देखना कि बकाया बैलेंस कितना है पिछले वर्ष के मुकाबले बैलेंस में कमी बेशी का व्याख्या एवं साल के अंत में क्या बैलेंस रहने वाला है उस पर विचार देना है।

विभिन्न शीर्ष निम्नलिखित है-

(i) I- लघु बचत और भविष्य निधि (Small savings &PF balances)
(ii) K- जमा और अग्रिम (Deposits & Advances)
(iii) F- ऋण और अग्रिम ( Loan & Advances)(जो ऋण केंद्र सरकार से लेते हैं और कर्मचारियों को देते हैं)
(iv) M- रेमिटेंस अंतर सरकार समायोजन लेखा (Remittances inter Govt. Adjustment)
(v) सामान्य

         वित्तीय वर्ष के लेखा बंद होने के बाद रिपोर्ट भेजने से पहले उपरोक्त प्रत्येक हेड की समीक्षा DHR टर्म के अनुसार करनी चाहिए। DHR बकाया के साथ विश्लेषण पर आधारित है इस रिपोर्ट के साथ ऑडिट का प्रमाण पत्र भी भेजा जाता है।

Difference Between Demand Recoverable and Bills Recoverable

Difference Between Demand Recoverable and Bills Recoverable.



वसूली योग्य मांग (Demand Recoverable)
बिल्स वसूली (Bills Recoverable)
1. वसूली योग्य मांग की शुरुआत रेलवे में 01.04.1988 से हुआ है।
1. बिल्स वसूली रेलवे में शुरू से ही है।
2. वसूली योग्य मांग यातायात उचन्त का एक भाग है अतः इसकी वसूली से यातायात उचन्त में कमी आती है जिससे परिचालन अनुपात बेहतर होता है।
2. बिल्स वसूली से राजस्व मांग में कमी आती है जिससे भी परिचालन अनुपात बेहतर होता है।
3. इसके प्रचालन का प्रमुख उद्देश्य है रेंट, लीज प्रभार बिल्डिंग का, ब्याज एवं अनुरक्षण प्रभार साइडिंगों का प्राइवेट पार्टियों से वसूल कर रेलवे के खाते में लाना।
3. इसके प्रचालन का प्रमुख उद्देश्य है जल, बिजली,कर्मचारी प्रभार प्राइवेट पार्टियों से वसूल कर रेलवे के खाते में लाना।
4. यह सरकारी और वाणिज्यिक लेखा को जोड़ने के लिए एक लिंक हेड है।
4. यह लिंक हेड नहीं है।
5.जब रेलवे बिल्स तैयार करती है तो-

वसूली योग्य मांग………..Dr.
To "Z" आय…………...Cr. 
5.जब रेलवे बिल्स तैयार करती है तो-

संबंधित राजस्व मांग……….Dr.
To चेक एंड बिल्स………...Cr.
6.जब पार्टी से भुगतान प्राप्त हो जाती है तो-
Remittance into Bank……….Dr.
To Demand Recovarable…...Cr.
6.जब पार्टी से वसुली हो जाती है तो-

Remittance into Bank………….Dr.
To Concerned Revenue Demand..Cr.
7. यह विविध आय का भाग है।
7. यह विविध आय भाग नहीं है, क्योंकि यह पार्टी से वसूली के पहले ही राजस्व व्यय के मांग में कम कर के लेखा में दिखाया गया है (सिर्फ पानी एवं बिजली प्रभार को छोड़कर)



Bills Recoverable (बिल्स वसूली)

पैरा 1138-लेखा संहिता I

  1. रेलवे द्वारा किसी पार्टी या व्यक्तियों को (जो रेलवे से संबंधित नहीं है) की गई सेवा, दी गई सामग्री या कोई अन्य प्रयोजन के लिए जो रकम वसूली की जाती है उसे बिल्स वसूली कहते हैं।
  2. रेलवे द्वारा अन्य पार्टियों को विभिन्न प्रकार की सेवा दी जाती है जैसे जमीन का किराया, बिल्डिंग किराया किंतु बिल्स वसूली के अंतर्गत दो सेवाएं में मुख्य रूप से आती है (i)वाणिज्य कर्मचारी/अन्य रेल कर्मचारी जो प्राइवेट साइडिंग पर कार्य कर रहा है।(ii) अन्य पार्टियों के बैगन का अनुरक्षण प्रभार।
  3. चूंकि रेलवे अपने कर्मचारियों को वेतन पहले ही दे दी होती है, अतः इसकी वसूली सुचारू रूप से हो इसके लिए एक रजिस्टर रखना चाहिए (1139-A-I) एवं प्रत्येक पार्टी के लिए अलग-अलग पृष्ठ खोलना चाहिए।
  4. रजिस्टर को मासिक रूप से समीक्षा करनी चाहिए जिसमें यह देखना चाहिए कि सभी पार्टियों से ठीक से वसूली हो रही है कि नहीं।
  5. लेखा अधिकारी का कर्तव्य होगा कि बिल की वसूली समुचित तरीके से वह यह सुनिश्चित करें इसके लिए संबंधित कार्यकारी अधिकारी को समय-समय पर ध्यान आकर्षित करें।

जनरल इंट्री

1.जब पार्टी से वसूली के लिए बिल्स तैयार किया जाता है तो-

संबंधित राजस्व शीर्ष..........................Dr.
To चेक एंड बिल्स............................Cr.

2.जब पार्टी से धन की वसूली हो जाती है तो-
Remittance into Bank(RIB).........Dr.
To Concerned Revenue Demand..Cr.

*उपरोक्त जनरल इंट्री वेतन के मामले में है।

cost plus contract

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