वित्तीय मर्यादा के मानक/वित्तीय औचित्य के सिद्धांत:-
स्त्रोत-रेलवे वित्त कोड vol. I Para-116
मंजूरी देने वाले प्राधिकारियों को चाहिए कि अपनी वित्तीय शक्तियों का प्रयोग करने में निम्नलिखित सिद्धान्तों का ध्यान रखें।
1. खर्च उससे अधिक नहीं बढ़ना चाहिए जितना कि अवसर मांग करें और हरेक सरकारी कर्मचारी को सार्वजनिक धन से किये जाने खर्च के संबंध में वही सावधानी बरतनी चाहिए जो साधारण बुद्धि का एक व्यक्ति अपने धन के खर्च करने में बरतता है।
2. कोई प्राधिकारी खर्च की मंजूरी देने की अपनी शक्तियों को ऐसे आदेश देने के लिए प्रयोग न करे, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में उसके अपने लाभ में हो।
3. सार्वजनिक धन का उपयोग किसी व्यक्ति या समाज के वर्ग विशेष के लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए जब तक कि:-
(I) उसमें निहित खर्च की रकम नगण्य न हो,या
(II) रकम का दावा अदालत में न किया जा सकता हो, या
(III) खर्च मान्य नीति या परम्परा के अनुसरण में न हो।
4. भत्तों की रकम, जैसे यात्रा-भत्ता, जो किसी विशेष प्रकार के खर्च को पूरा करने के लिए मंजूर किया गया है, का विनियमयन इस प्रकार किया जाए कि भत्ते कुल मिलाकर पाने के लिए लाभ का स्त्रोत न बनें।
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